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Day: September 24, 2016

हिंदी गृहकार्य कक्षा -८ सभी वर्गों के लिए

हिंदी गृहकार्य कक्षा -८ सभी वर्गों के लिए

प्रिय विद्यार्थियों,
निम्नलिखित कहानी का सस्वर वाचन कीजिये ।   सच्ची  मित्रता के लिए  किन गुणों का होना आवश्यक है । इस पर २६ /०९/२०१६ के दिन  कक्षा में  चर्चा की  जाएगी ।  

कृष्ण-सुदामा की मित्रता

कृष्ण-सुदामा की मित्रता बहुत प्रचलित है। सुदामा गरीब ब्राह्मण थे। अपने बच्चों का पेट भर सके उतने भी सुदामा के पास पैसे नहीं थे। सुदामा की पत्नी ने कहा, “हम भले ही भूखे रहें, लेकिन बच्चों का पेट तो भरना चाहिए न ?” इतना बोलते-बोलते उसकी आँखों में आँसू आ गए। सुदामा को बहुत दुःख हुआ। उन्होंने कहा, “क्या कर सकते हैं ? किसी के पास माँगने थोड़े ही जा सकते है।”
पत्नी ने सुदामा से कहा, “आप कई बार कृष्ण की बात करते हो। आपकी उनके साथ बहुत मित्रता है ऐसा कहते हो। वे तो द्वारका के राजा हैं। वहाँ क्यों नहीं जाते ? जाइए न ! वहाँ कुछ भी माँगना नहीं पड़ेगा !”
सुदामा को पत्नी की बात सही लगी। सुदामा ने द्वारका जाने का तय किया। पत्नी से कहा, “ठीक है, मैं कृष्ण के पास जाऊँगा। लेकिन उसके बच्चों के लिए क्या लेकर जाऊँ ?”
सुदामा की पत्नी पड़ोस में से पोहे ले आई। उसे फटे हुए कपडे में बांधकर उसकी पोटली बनाई। सुदामा उस पोटली को लेकर द्वारका जाने के लिए निकल पड़े।
द्वारका देखकर सुदामा तो दंग रह गए। पूरी नगरी सोने की थी। लोग बहुत सुखी थे। सुदामा पूछते-पूछते कृष्ण के महल तक पहुँचे। दरवान ने साधू जैसे लगनेवाले सुदामा से पूछा, “एय, यहाँ क्या काम है ?”
सुदामा ने जवाब दिया, “मुझे कृष्ण से मिलना है। वह मेरा मित्र है। अंदर जाकर कहिए कि सुदामा आपसे मिलने आया है।”
दरवान को सुदामा के वस्त्र देखकर हँसी आई। उसने जाकर कृष्ण को बताया। सुदामा का नाम सुनते ही कृष्ण खड़े हो गए ! और सुदामा से मिलने दौड़े । सभी आश्चर्य से देख रहे थे ! कहाँ राजा और कहाँ ये साधू ?

Krishna -and -sudamaकृष्ण सुदामा को महल में ले गए। सांदीपनी ऋषि के गुरुकुल के दिनों की यादें ताज़ा की। सुदामा कृष्ण की समृद्धि देखकर शर्मा गए। सुदामा पोहे की पोटली छुपाने लगे, लेकिन कृष्ण ने खिंच ली। कृष्ण ने उसमें से पोहे निकाले। और खाते हुए बोले, “ऐसा अमृत जैसा स्वाद मुझे और किसी में नहीं मिला।”

बाद में दोनों खाना खाने बैठे। सोने की थाली में अच्छा भोजन परोसा गया। सुदामा का दिल भर आया। उन्हें याद आया कि घर पर बच्चों को पूरा पेट भर खाना भी नहीं मिलता है। सुदामा वहाँ दो दिन रहे। वे कृष्ण के पास कुछ माँग नहीं सके। तीसरे दिन वापस घर जाने के लिए निकले। कृष्ण सुदामा के गले लगे और थोड़ी दूर तक छोड़ने गए।

घर जाते हुए सुदामा को विचार आया, “घर पर पत्नी पूछेगी कि क्या लाए ? तो क्या जवाब दूँगा ?”

सुदामा घर पहुँचे। वहाँ उन्हें अपनी झोपड़ी नज़र ही नहीं आई ! उतने में ही एक सुंदर घर में से उनकी पत्नी बाहर आई। उसने सुंदर कपड़े पहने थे। पत्नी ने सुदामा से कहा, “देखा कृष्ण का प्रताप ! हमारी गरीबी चली गई कृष्ण ने हमारे सारे दुःख दूर कर दिए।” सुदामा को कृष्ण का प्रेम याद आया। उनकी आँखों में खूशी के आँसू आ गए।

देखा दोस्तों, कृष्ण और सुदामा का प्रेम यानी सच्चा मित्र प्रेम। तो दोस्तों सच्चे प्रेम में ऊँच या नीच नहीं देखी जाती और न ही अमीरी-गरीबी देखी जाती है। इसीलिए आज इतने युगों के बाद भी दुनिया कृष्ण और सुदामा की दोस्ती को सच्चे मित्र प्रेम के प्रतीक के रूप में याद करती है।

भवदीय

हिंदी विभाग

Mathematics: Measurement

Mathematics: Measurement

Grade7 – G7 Acuity
Homework submitted by: jyoti.khandelwal@fountainheadschools.org
Submission Date: Tue Sep 27 2016 00:00:00 GMT+0530 (IST)
Internet Required: No
Details: Worksheet:
Question 1, 2 and 12 to 20
Please note that the following hw was already given to you on Thursday.
Expected Time: 40

Learning the hard way

Learning the hard way

Grade 4 students participated in a day long set of activities under the unit “Risk and Challenges” where in they had opportunities to get a feel of a child labourer’s life as well as the risks and challenges that millions of child labourers across the world face. The learners got a hands on experience of physical work by engaging into activities such as cleaning the dining area, the assembly and even the washrooms.  After the toiling cleaning sessions, the learners were served basic food that normally children of economically challenged class are able to get at times – dal and rice, served on a baaj.

The learners expressed the feeling of a bundle of realizations about the harsh life that a lot
of children may be undergoing on a daily basis. They were able to empathize and were compassionate towards children who are forced to live this difficult life, being deprived of many luxuries and comforts. Kudos to all the children with wholeheartedly participating in these activities and engage into some really fruitful learning.

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Grade 11_Biology_highlights

Grade 11_Biology_highlights

Hello all,

In this week, we discussed about three phases of cell-cycle (Prophase, Metaphase, Anaphase). Students then performed an experiment using potato. They cut the potato pieces using cork borer and dipped them into different salt solution for a definite period of time. Then, they took the readings. The experiment was performed successfully. Then, they had their life-class.

Regards,

Jay Kosambia & Anika Mehta

Menu for the month of October,2016

Menu for the month of October,2016

Dear parents,

This time, the menu for the whole school is made by student council members (members of the student council are elected by the students of grade 7 to 12). They were given a list of food items by the school and  were given an opportunity to frame the school menu. The student council members collected votes from the senior school students (grade 7 to 12) using a google form. Based on everyone’s votes, they designed the menu for the month of October.

Menu for the month of October,2016