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Day: October 11, 2016

हिंदी गृहकार्य कक्षा -८ सभी वर्गों के लिए

हिंदी गृहकार्य कक्षा -८ सभी वर्गों के लिए

 प्रिय विद्यार्थियों,

अब्दुल कलाम के जीवन से जुड़े इन प्रेरक प्रसंगों को ध्यान से पढ़िए ।  १४ /१०  /२०१६ को कक्षा में चर्चा  जाएगी ।

जन्म: 15 अक्टूबर 1931, रामेश्वरम, तमिलनाडु

मृत्यु: 27 जुलाई, 20 15, शिलोंग, मेघालय

पद/कार्य: भारत के पूर्व राष्ट्रपति

प्रारंभिक जीवन

अवुल पकिर जैनुलअबिदीन अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक मुसलमान परिवार मैं हुआ। उनके पिता जैनुलअबिदीन एक नाविक थे और उनकी माता अशिअम्मा एक गृहिणी थीं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी इसलिए उन्हें छोटी उम्र से ही काम करना पड़ा। अपने पिता की आर्थिक मदद के लिए बालक कलाम स्कूल के बाद समाचार पत्र वितरण का कार्य करते थे। अपने स्कूल के दिनों में कलाम पढाई-लिखाई में सामान्य थे पर नयी चीज़ सीखने के लिए हमेशा तत्पर और तैयार रहते थे। उनके अन्दर सीखने की भूख थी और वो पढाई पर घंटो ध्यान देते थे। उन्होंने अपनी स्कूल की पढाई रामनाथपुरम स्च्वार्त्ज़ मैट्रिकुलेशन स्कूल से पूरी की और उसके बाद तिरूचिरापल्ली के सेंट जोसेफ्स कॉलेज में दाखिला लिया, जहाँ से उन्होंने सन 1954 में भौतिक विज्ञान में स्नातक किया। उसके बाद वर्ष 1955 में वो मद्रास चले गए जहाँ से उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की शिक्षा ग्रहण की। वर्ष 1960 में कलाम ने मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढाई पूरी की।

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन से जुडी  ऐसी अद्भुत  कहानियाँ, जो हमको एक नई सीख देती है !

Story#1: Abdul Kalam – “Humanity” 

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने इमारत की दीवार पर  टूटे हुए शीशों के टुकड़े लगाने के सुझाव को ठुकरा दिया था। क्योकि इससे दीवार पर बैठने वाले पक्षियों को चोट लग सकती थी

यह बात उस समय की है, जब डॉ एपीजे अब्दुल कलाम डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन (DRDO) में काम कर रहे थे। तब भवन की सुरक्षा के लिए उनके साथ काम कर रहे अन्य लोगों ने इमारत की दीवार पर टूटे हुए शीशों के टुकड़े लगाने के बारे में सुझाव दिया। लेकिन जब यह बात डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को पता चली, तब उन्होंने ऐसा करने से सबको रोक। क्योकि ऐसा करने से, उस दीवार पर बैठने वाले पक्षी घायल हो सकते थे।

Story#2: Abdul Kalam – “Gratitude” 

राष्ट्रपति कलाम ने, खुद अपने से धन्यवाद कार्ड लिखा!

एक बार एक व्यक्ति ने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का स्कैच बना कर उन्हें भेजा। उन्हें यह जान कर बहुत आश्चर्य हुआ कि डॉ कलाम ने खुद अपने हाथों से उनके लिए एक संदेश और अपना हस्ताक्षर करके एक थैंक यू कार्ड भेजा है।

Story#3: Abdul Kalam – “Charity”

राष्टपति कलाम ने अपने जीवन भर की बचत और वेतन, एक संस्था PURA (जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है) को दे दिया।

भारत सरकार, वर्तमान राष्ट्रपति के साथ-साथ सभी पूर्व राष्ट्रपति का ख्याल रखती है। इसलिए जब डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, राष्ट्रपति बने तो उन्होंने अपने जीवनभर की कमाई, PURA नामक संस्था को दे दिया। डॉ कलाम ने  डॉ वर्गीज कुरियन (अमूल के संस्थापक) को फोन किया और यह पूछा कि अब मैं इस देश का राष्ट्रपति हूँ और भारत सरकार, मेरे जीवित रहने तक, मेरा ख्याल रखेगी, इसलिए मैं इस बचत और वेतन का क्या करूँगा?

शिक्षण के अलावा डॉ कलाम ने कई पुस्तकें भी लिखी जिनमे प्रमुख हैं – ‘इंडिया 2020: अ विज़न फॉर द न्यू मिलेनियम’, ‘विंग्स ऑफ़ फायर: ऐन ऑटोबायोग्राफी’, ‘इग्नाइटेड माइंडस: अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया’, ‘मिशन इंडिया’, ‘इंडोमिटेबल स्पिरिट’ आदि।

भवदीय

हिंदी विभाग